एक ऐसा गांव जहाँ जाने के लिए आर्मी की अनुमति लेनी पड़ती है

भारत में एक ऐसा गांव जहाँ जाने के लिए आर्मी की अनुमति लेनी पड़ती है

हिमालय की गोद में छुपा एक ऐसा गाँव जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते है। यहाँ बिना आर्मी की इजाजत के कोई भी नहीं जा सकता। क्यों की ऐसा माना जाता है की यहाँ आज भी आर्य लोग रहते हैं। जो आर्यों की उत्पति से लेकर आज तक अपनी संस्कृति को बचाए हुए हैं।

यह गाँव है दाह गाँव जो लद्दाख में है।

हाँ यहाँ हम घूमने जा सकते हैं,लेकिन इसके लिए आर्मी की अनुमति लेनी आवश्यक है। यहाँ पर बहुत से टुरिस्ट आते हैं। ओर इनकी संस्कृति को समझने की कोशिस करते है।
कहते हैं की ये पिछले 8000 सालों से अपनी संस्कृति को बचाए हुये हैं। ओर इनकी आबादी केवल 2000 लोगों के आस पास ही है।

शारीरिक बनावट……

लंबा चौड़ा शरीर।
ऊंची कद काठी।
नीली आँखें।

इनके रहन सहन की बात करें तो

पुरुष और महिलाएं दोनों ही कलरफुल कपड़े पहनते हैं। महिलाएं यहां पाए जाने वाले फूल मोन्थू थो या शोक्लो से अपने बाल सजाती हैं। पुरुष अपने कान में मोती पहनते हैं। शादीशुदा महिलाएं गूंथकर चोटी करती हैं जिसकी वजह से वो कुछ-कुछ ग्रीक महिलाओं जैसी दिखती हैं। भेड़ की स्किन से बने कपड़े, बालों में ऑरेंज फूल और सिल्वर गहने एक ट्रेडिशनल ब्रोकपास ड्रेस है।अच्छे नाक नक्शे, हेल्दी स्किन और फूलों से सजी ये महिलाएं बहुत खूबसूरत दिखती हैं। पुरुषों की नीली आंखे और अच्छा बिल्ड उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाता है। यहां आर्यन्स की भाषा ब्रेक्सकाड बोली जाती है और ये बौद्धिज्म को फॉलो करते हैं।

इनका खाना…..

यहां लोग शाकाहारी होते हैं, यहां तक की गाय का दूध और दूध से बनी चीजें भी नहीं खाते। यहां बकरी का दूध चलता है। खाने में जौ की रोटी, हरी पत्ते वाली सब्जियां लेते हैं। यहां बादाम, एप्रिकोट और अखरोट बहुतायत मे मिलते हैं और खूब खाए भी जाते हैं। यहां लोग ब्लैक चाय में जौ का आटा डालकर बहुत पीते हैं।
यहाँ के उत्सव ओर त्योहार …
ये लोग गाते नाचते और खुश रहते हैं। तीन साल में एक बार यहां बोनोनाह फेस्टिवल मनाया जाता है, जो अच्छी फसल होने की खुशी में मनाते हैं। इसमें लड़के-लड़कियां अपने साथी को भी चुनते हैं।

जब किसी के घर पर नया मेहमान आता है तो बांगरी फेस्टिवल मनाया जाता है।
याता फेस्टिवल में जब भी कोई गांव वाला अमीर हो जाता है, वो पूरे गांव के लिए खाने का इंतजाम करता है। यहां नया साल भी बहुत धूमधाम से मनाते हैं।

जीविका के लिए

ब्रोकपास अपने एप्रिकोट, अंगूर और अखरोट के प्रोडक्ट्स के लिए फेमस हैं। यहां नेचर में जो भी मिलता है, उसका ये लोग अच्छी तरह यूज करते हैं। टमाटर और एप्रिकोट का तेल आर्मी और दूसरे लोगों को सप्लाई करते हैं। अंगूर की वाइन भी बनती है। यहां पर 70 से ज्यादा उम्र के काफी आर्यन हैं। 90 की उम्र में भी ये काफी एक्टिव होते हैं।

कैसे जाएं…

लेह में ये गांव कारगिल-बटालिक-लेह NH-1 रोड पर स्थित हैं। यहां तक टैक्सी या अपनी कार से आ सकते हैं। यहां तक पहुंचकर आगे इन गांवों में सिर्फ ट्रैकिंग करके ही जा सकते हैं क्योंकि ये पहाड़ों पर बसे हैं। इन गांवों में जाने के लिए डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर से इनर लाइन परमिट लेनी पड़ती है, क्योंकि बटालिक के पास ही LOC सेक्टर पड़ता है। लेह तक फ्लाइट से आकर आगे की यात्रा करें।

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कहां रुकें

दाह और हानू गांव में रुकने के लिए होम स्टे और गेस्टहाउस हैं। अवेलेबिलिटी पहले से पता कर लें। कारगिल में भी रुक सकते हैं, यहां काफी सारे होटल हैं।

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